Sunday, February 1, 2026

📅 फरवरी 2026 व्रत‑त्यौहार सूची

 

तारीखदिनव्रत / त्योहार का नाम
1 फरवरीरविवारमाघ पूर्णिमा, गुरु रविदास जयंती, ललिता जयंती, थाई पूसम
2 फरवरीसोमवारफाल्गुन मास प्रारंभ
5 फरवरीगुरुवारद्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी
7 फरवरीशनिवारयशोदा जयंती
8 फरवरीरविवारभानु सप्तमी, शबरी जयंती
9 फरवरीसोमवारजानकी जयंती, मासिक कालाष्टमी
13 फरवरीशुक्रवारविजया एकादशी, कुंभ संक्रान्ति
14 फरवरीशनिवारशनि त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत
15 फरवरीरविवारमहाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि
17 फरवरीमंगलवारफाल्गुन अमावस्या (दर्श अमावस्या)
18 फरवरीबुधवारफुलेरा/फुलैरा दूज
19 फरवरीगुरुवाररामकृष्ण जयंती, शिवाजी महाराज जयंती
21 फरवरीशनिवारढुण्ढिराज चतुर्थी
22 फरवरीरविवारस्कंद षष्ठी
24 फरवरीबुधवारहोलाष्टक प्रारंभ, अन्नपूर्णा अष्टमी
27 फरवरीशुक्रवारआमलकी एकादशी
28 फरवरीशनिवारशुक्ल प्रदोष व्रत

🌕 माघी पूर्णिमा: आस्था, पवित्र स्नान और आध्यात्मिक उत्कर्ष का महापर्व

 माघी पूर्णिमा हिंदू पंचांग के माघ मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन और शुभ पर्व है। यह दिन पूरे माह चलने वाले माघ स्नान, दान‑पुण्य, व्रत और साधना का अंतिम एवं सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर आत्मिक शुद्धि, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का संकल्प लेते हैं।

🌅 माघी पूर्णिमा 2026 की तिथि एवं शुभ समय

साल 2026 में माघी पूर्णिमा 1 फरवरी (रविवार) को मनाई जाएगी।

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: सुबह 05:52 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 फरवरी, सुबह 03:38 बजे
  • चंद्रोदय: शाम 05:26 बजे

🌟 माघी पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

माघ मास को शास्त्रों में तप, दान, पवित्र स्नान और आध्यात्मिक साधना का मास कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन देवगण पृथ्वी पर अवतरित होकर नदियों में स्नान करते हैं और भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

  • पवित्र स्नान से पापों का क्षय होता है।
  • यह दिन दान, उपवास और धर्म-कर्म का श्रेष्ठ फल देता है।
  • प्रयागराज, वाराणसी और हरिद्वार जैसे स्थानों पर यह दिन कल्पवास का अंतिम दिन माना जाता है, जो तपस्या और आत्मसंयम का महाव्रत है।

🛕 पूजा-विधि और अनुष्ठान

ब्रह्ममुहूर्त में स्नान

सुबह जल्दी उठकर पवित्र जल या गंगाजल युक्त जल से स्नान किया जाता है। नदी स्नान संभव न हो तो घर पर भी विधिपूर्वक स्नान शुभ माना जाता है।

सूर्य और चंद्र देव को अर्घ्य

स्नान के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य और चंद्रोदय के समय चंद्र देव को जल अर्पित किया जाता है।

विष्णु और लक्ष्मी पूजन

सत्यनारायण व्रत, विष्णु और लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। पीले फूल, तुलसी, पंचामृत और भोग अर्पित किए जाते हैं।

दान-पुण्य

तिल, गुड़, भोजन, वस्त्र, कंबल आदि का दान माघी पूर्णिमा के सबसे शुभ कार्यों में से एक माना गया है।

🌍 भारत में माघी पूर्णिमा का उत्सव

प्रयागराज

त्रिवेणी संगम पर लाखों श्रद्धालु माघ स्नान के लिए एकत्र होते हैं। यह माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

वाराणसी

गंगा घाटों पर सुबह का पवित्र स्नान, दिन भर पूजा-पाठ और शाम की भव्य गंगा आरती का अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभव प्रदान करता है।

दक्षिण भारत

मदुरै और श्रीरंगम जैसे प्रतिष्ठित मंदिरों में विशेष पूजन, अभिषेक और दान की परंपरा निभाई जाती है।

🧘‍♂️ व्रत का महत्व

माघी पूर्णिमा का व्रत मन, शरीर और आत्मा की पवित्रता का प्रतीक है।

  • उपवास मन को संयमित करता है
  • ध्यान और मंत्र जप से मानसिक शांति मिलती है
  • दान और सेवा से हृदय निर्मल होता है
  • यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य प्राप्ति का श्रेष्ठ साधन माना जाता है

✨ निष्कर्ष

माघी पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक जागरण और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर वह दिव्य दिन है जो जीवन में शांति, समृद्धि और सद्भाव का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस पवित्र दिवस पर स्नान, ध्यान, पूजा और दान जैसी सरल क्रियाएँ भी जीवन में गहन बदलाव ला सकती हैं।