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Monday, February 13, 2017

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Kind Regards!

Vivek Anjan Shrivastava

 

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Sunday, December 18, 2016

क्‍या भूलूं क्‍या याद करूं

जीवन निर्झर में बहते किन
अरमानों की बात करूं
तुम्‍हीं बता तो प्रियवर मेरे
क्‍या भूलूं क्‍या याद करूं

भाव निचोड़ में कड़वाहट से
या हृदय शेष की अकुलाहट से
किस राग करूण का गान करूं
क्‍या भूलूं क्‍या याद करूं

भ्रमित पंथ के मधुकर के संग
या दिनकर की आभा के संग
किस सौरभ का पान करूं
क्‍या भूलूं क्‍या याद करूं

उजड़े उपवन के माली से
प्रस्‍तुत पतझड़ की लाली से
किस हरियाली की बात करूं

क्‍या भूलूं क्‍या याद करूं

Monday, June 8, 2015

अंततः FLIPKART तक पहुंच ही गए

http://www.flipkart.com/vidhwaan-kaviyon-ka-antarman/p/itmdy8m9tgvdbayn?pid=9789384236205&ref=L%3A1156165615059355101&srno=p_15&query=utkarsh+prakashan&otracker=from-search

Friday, December 19, 2014

‘लालबहादुर शास्त्री’


किसी गाँव में रहने वाला एक छोटा लड़का अपने दोस्तों के साथ गंगा नदी के पार मेला देखने गया। शाम को वापस लौटते समय जब सभी दोस्त नदी किनारे पहुंचे तो लड़के ने नाव के किराये के लिए जेब में हाथ डाला। जेब में एक पाई भी नहीं थी। लड़का वहीं ठहर गया। उसने अपने दोस्तों से कहा कि वह और थोड़ी देर मेला देखेगा। वह नहीं चाहता था कि उसे अपने दोस्तों से नाव का किराया लेना पड़े। उसका स्वाभिमान उसे इसकी अनुमति नहीं दे रहा था।

उसके दोस्त नाव में बैठकर नदी पार चले गए। जब उनकी नाव आँखों से ओझल हो गई तब लड़के ने अपने कपड़े उतारकर उन्हें सर पर लपेट लिया और नदी में उतर गया। उस समय नदी उफान पर थी। बड़े-से-बड़ा तैराक भी आधे मील चौड़े पाट को पार करने की हिम्मत नहीं कर सकता था। पास खड़े मल्लाहों ने भी लड़के को रोकने की कोशिश की।

उस लड़के ने किसी की न सुनी और किसी भी खतरे की परवाह न करते हुए वह नदी में तैरने लगा। पानी का बहाव तेज़ था और नदी भी काफी गहरी थी। रास्ते में एक नाव वाले ने उसे अपनी नाव में सवार होने के लिए कहा लेकिन वह लड़का रुका नहीं, तैरता गया। कुछ देर बाद वह सकुशल दूसरी ओर पहुँच गया।

उस लड़के का नाम था 'लालबहादुर शास्त्री'

 

मुझे इतना विश्वास है।

सीमाएं अपनी जानता हूँ मैं

जबतक सांस है दिल में आस है।

काम मेरा रुका कभी भी नहीं

उस पर मुझे इतना विश्वास है।

 

आतंकी नस्लों को।

 

जिनने बोया हे धरती में बम बारूदी असलों को।
निर्ममता से जिन्होंने कुचला फूलों की फसलों को।
मासूमों के खून से जिनने खून की होली खेली हे
करदो नेस्तनाबूत धरा से इन आतंकी नस्लों को।