अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता और जीवन-कर्म के बीच की दूरी को निरंतर कम करने की कोशिश का संघर्ष....
Friday, May 20, 2011
राजनीति
Tuesday, May 3, 2011
‘हम तुम्हारे अब भी हैं’
कहने को तो हम, खुश अब भी हैं
हम तुम्हारे तब भी थे, हम तुम्हारे अब भी हैं
रूठने-मनाने के इस खेल में, हार गए हैं हम
हम तो रूठे तब ही थे, आप तो रूठे अब भी हैं
मेरी ख़ता बस इतनी है, तुम्हारा साथ चाहता हूँ
तब तो पास होके दूर थे, और दूरियाँ अब भी हैं
मुझसे रूठ के दूर हो, पर एहसास तो करो
प्यासे हम तब भी थे, प्यासे हम अब भी हैं
इस इंतज़ार में मेरा क्या होगा, तुम फिक्र मत करना
सुकून से हम तब भी थे, सुकून से हम अब भी हैं
बस थोड़ा रूठने के अंजाम से डरते हैं
डरते हम तब भी थे, डरते हम अब भी हैं
हमारी तमन्ना कुछ ज़्यादा नहीं थी, जो पूरी न होती
कम में गुज़ारा तब भी था, कम में गुज़ारते अब भी हैं
चलते हैं तीर दिल पे कितने, जब तुम रूठ जाते हो
ज़ख्मी हम तब भी थे, ज़ख्मी हम अब भी हैं
मेरी मासूमियत को तुम, ख़ता समझ बैठे हो
मासूम हम तब भी थे, मासूम हम अब भी हैं
आप हमसे रूठा न करें, बस यही इल्तिजा है
फ़रियादी हम तब भी थे, फ़रियादी हम अब भी हैं
तुम हो किस हाल में, कम से कम ये तो बता दो
बेखब़र हम तब भी थे, बेखब़र हम अब भी हैं
Monday, May 2, 2011
सूचना प्रौद्योगिकी युग और हिंदी का बढ़ता वर्चस्व
पिछली सदियों के इंसान को यदि जिन्दा करके कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप, आईपोड जैसी न जाने कितनी ही चमत्कारी वस्तुएँ दिखा दी जाए तो बेचारा गश खाकर गिर पड़े. आज की पीढी इन चीजों के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. ज्ञान के क्षेत्र में इन्सानों की सबसे बड़ी उपलब्धि इन्टरनेट की खोज है, इस युग में जो इन्टरनेट उपयोग नहीं करता, तो वह व्यावहारिक रूप से निरक्षर माना जाता हैं.
आज पूरी दुनिया में इन्टरनेट का उपयोग हो रहा हैं, भले ही कुछ देशों में यह प्रयोग कम हैं और कुछ में ज्यादा. भारत की ८ % से भी कम आबादी इन्टरनेट का उपयोग करती हैं. यह अनुपात विकसित देशों में ९०% आबादी की तुलना मे काफी कम हैं. सूचना प्रोद्योगिकी की शुरुआत भले ही अमेरीका में हुई हो, फिर भी भारत की मदद के बिना यह आगे नहीं बढ़ सकती थी. गूगल के एक वरिष्ट अधिकारी की ये स्वीकारोक्ति काफी महत्वपूर्ण हैं की आने वाले कुछ वर्षों में भारत दुनिया के बड़े कंप्यूटर बाजारों में से एक होगा और इन्टरनेट पर जिन तीन भाषाओं का दबदबा होगा वे हैं- हिंदी, मेंडरिन और अंग्रेजी. इसकी पुष्टि इस तथ्य से होती हैं कि आज भारत में ८ करोड़ लोग इन्टरनेट का उपयोग करते हैं इस आधार पर हम अमेरिका, चीन और जापान के बाद ४ वे नंबर पर हैं. जिस रफ़्तार से यह संख्या बढ़ रही हैं, वह दिन दूर नहीं जब भारत में इन्टरनेट उपयोगकर्ता विश्व में सबसे अधिक होंगे.
आमतौर पर यह धारणा हैं कि कंप्यूटरों का बुनियादी आधार अंग्रेजी हैं, यह धारणा सिरे से गलत हैं. कंप्यूटर कि भाषा अंको की भाषा है और अंको में भी केवल ० और १. कोई भी तकनीक और मशीन उपभोक्ता के लिये होती हैं. इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती हैं की उससे कैसे उपभोक्ता के अनुरूप ढला जाए. भारत के सन्दर्भ में कहें, तो आईटी के इस्तेमाल को हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं के अनुरूप ढलना ही होगा. यह अपरिहार्य हैं, क्योंकि हमारे पास संख्या बल हैं. इसी के मद्देनजर सोफ्टवेयर की बड़ी कम्पनीयां अब नए बाजार के तलाश में सबसे पहले भारत का ही रुख करती हैं. ऐसा किसी उदारतावश नहीं, बल्कि व्यावसायिक बाध्यता के कारण संभव हुआ हैं. हमने तो अभी बस इन्टरनेट और मोबाइल तकनीकों का स्वाद चखा हैं और सम्पूर्ण विश्व के बाज़ार में हाहाकार मचा दिया.
इन्टरनेट पर हिंदी के पोर्टल अब व्यावसायिक तौर पर आत्मनिर्भर हो रहे हैं. कई दिग्गज आईटी कंपनियां चाहे वो याहू हो, गूगल हो या कोई और ही सब हिंदी अपना रहीं हैं. माइक्रोसॉफ्ट के डेस्कटॉप उत्पाद हिंदी में उपलब्ध हैं. आई बी ऍम , सन-मैक्रो सिस्टम, ओरक्ल आदि ने भी हिंदी को अपनाना शुरू कर दिया हैं. इन्टरनेट एक्सप्लोरर, नेट्स्केप, मोज़िला, क्रोम आदि इन्टरनेट ब्राउज़र भी खुल कर हिंदी का समर्थन कर रहे हैं. आम कंप्यूटर उपभोक्ताओं के लिये कामकाज से लेकर डाटाबेस तक हिंदी में उपलब्ध हैं.
ज्ञान के किसी भी क्षेत्र का नाम ले, उससे संबन्धित हिंदी वेबसाइट आपका ज्ञानवर्धन के लिये उपलब्ध हैं. आज यूनीकोड के आने से कंप्यूटर पर अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं पर काम करना बहुत ही आसान हो गया हैं. यह दिलचस्प संयोग हैं की इधर यूनीकोड इनकोडिंग सिस्टम ने हिंदी को अंग्रेजी के समान सक्षम बना दिया है और इसी समय भारतीय बाजार का जबरदस्त विस्तार हुआ हैं. अब भारत सरकार भी इस मुद्दे पर गंभीर दिखता हैं और डी.ओ.इ. इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड ले-आउट को कंप्यूटर के लिये अनिवार्य कर सकता है.
हमें यह गर्व करने का अधिकार तो हैं ही कि हमारे संख्या बल ने हिंदी भाषा को विश्व के मानचित्र पर अंकित कर दिया हैं. यह भी एक सत्य हैं कि किसी भी भाषा का विकास और प्रचार किसी प्रेरणा, प्रोत्साहन या दया का मोहताज नहीं, यह तो स्वतः विकास के राह पर आगे बढ़ता रहता हैं. आज प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फिल्में हो या सीरियल्स, डिस्कवरी, जिओग्राफिक हो या हिस्ट्री या हो कार्टून सभी पर हिंदी कि तूती बोलती हैं. ये सभी तथ्य हमें हिंदी के उज्वल भविष्य के प्रति आश्वस्त करते है.
हिंदी के भविष्य कि इस उजली तस्वीर के बीच हमें हिंदी को प्रोद्योगिकी के अनुरूप ढालना हैं. कंप्यूटर पर केवल यूनीकोड को अपनाकर हम अर्ध मानकीकरण तक ही पहुच पाएंगे, जरुरत हैं यूनीकोड के साथ ही इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड ले-आउट को अपनाने कि ताकि पूर्ण मानकीकरण सुनिश्चित किया जा सके. हिंदी साहित्य या समाचार आधारित वेबसाइट के अलावा तकनीक, विज्ञान, वाणिज्य आदि विषयों पर वेबसाइट तैयार करने की. उपयोगी अंग्रेज़ी साईट को हिंदी में तैयार करने की. इन सबके बीच अपनी भाषा की प्रकृति को बरकार रखते हुए इसमें लचीलापन लाना होगा. आइये, प्रोद्योगिकी के इस युग में हिंदी के उज्ज्वल भविष्य के बीच हम इसके प्रति सवेदनशील बने और खुद को इसकी प्रगति में भागीदार बनाएँ.
Friday, April 8, 2011
दुनिया में मशहूर हुआ भारत
08 अप्रैल 2011: आईबीएन-7
भ्रष्टाचार के मामले में लगता है भारत दुनिया के हर बड़े भ्रष्ट देश के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने में लगा हुआ है। तभी तो पूरी दुनिया में भारत भ्रष्टाचार के मामले में 87वें स्थान पर पहुंच गया है।
इतना ही नहीं भ्रष्टाचार के मामले में भारत, एशिया में 16वें स्थान पर और एशिया प्रशांत क्षेत्र में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।
भारत में हुए कुछ ऐसे बड़े भ्रष्टाचार जिसने सरकार की नींद हराम कर दी।
1. टेलीकॉम घोटाला- 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए
2. कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला- 70 हजार करोड़ रुपए
3. बोफोर्स घोटाला- 64 करोड़ रुपए
4. अनाज घोटाला- 2 लाख करोड़ रुपए
5. यूरिया घोटाला- 133 करोड़ रुपए
6. चारा घोटाला- 950 करोड़ रुपए
7. शेयर घोटाला- 4000 करोड़ रुपए
8. सत्यम घोटाला- 7000 करोड़ रुपए
( अनुमानित )
भारत में भ्रष्टाचार को बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान हमारे देश के नेताओं का है। दूसरे नंबर आते हैं हमारे सरकारी तंत्र के 'नौकरशाहों' जिन्होंने सरकारी तंत्र को भ्रष्ट तंत्र बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। तीसरे नंबर पर आते हैं स्वास्थय और शिक्षा विभाग।
Thursday, April 7, 2011
73 बर्ष का सुपरस्टार
मैं बाग़ी नहीं पर उसके समझने के लिए,मेरी आंखों मे जरा इंक़लाब रहने दे।
आप भी हल्ला बोल के लिए तैयार हो जाइये !





