अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता और जीवन-कर्म के बीच की दूरी को निरंतर कम करने की कोशिश का संघर्ष....
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Thursday, April 27, 2017
तुम्हारी भावनाएं
तुम्हारी आँखे वैसी नहीं जिन्हें कह सकूं नशीली तुम्हारी मुस्कान भी तो सजावटी नहीं तुम्हारे दांत नहीं हैं मोतियों जैसे शक्लो-सूरत से भी परी नहीं हो तुम। पर फिर भी सबसे बढ़कर हैं तुम्हारी भावनाएं
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