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Wednesday, June 17, 2009

मुझे खत लिखना, मेरे गाँव में

खत लिखना
कभी रोजी-रोटी के गणित से
फुरसत मिले
तो मौसम और फूलों के बारे में
लिखना
कभी महंगाई और राशन से ध्यान बंटे
तो तितलियों और पर्वतों
के बारे में लिखना
कभी बीमारी और अस्पतालों से
वक्त मिले तो अपने शहर की रंगीनी
और नदी के यौवन के बारे में लिखना
मेरे दोस्त
हादसों से गुजरते हुए
मुझे खत लिखना

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