Thursday, September 11, 2014

कृष्णाष्टमी


भादव  कृष्णाष्टमी   को  जन्माष्टमी   कहते  हैं।इसी  दिन  मथुरा  में  श्रीकृष्ण  का  जन्म  हुआ  था। इस  तिथि  की  रात्रि  में  यदि  रोहिणी  नक्षत्र  हो  तो  कृष्ण  जयन्ती  होती  है। रोहिणी  नक्षत्र  के  अभाव  में  केवल  जन्माष्टमी  व्रत  का  ही  योग  होता  है। इस  सभी  स्त्री-पुरुष  नदी  के  जल  में  तिल  मिलाकर  नहाते  हैं पंचामृत  से  भगवान  कृष्ण  की  प्रतिमा  को  स्नान  कराया  जाता  है , उन्हें  सुन्दर  वस्त्राभूषणों  से  सजाकर  सुन्दर  हिन्डोले   में  विराजमान  करते  हैं। धूप-दीप  पुष्पादि  से  पूजन  करते  हैं, आरती  उतारते  हैं तथा  माखन-मिश्री   आदि  का  भोग  लगाते  हैं। कीर्तन-हरिगुनगान  करते  हैं।१२  बजे  रात  को  खीरा चीरकर  भगवान  श्रीकृष्ण  का  जन्म  कराते  हैं।रात  में  मूर्ति   के  पास   ही   पृथ्वी  पर  शयन  करना  चाहिये। इस  दिन  गऊ दान   का  बहुत  महत्व  है।इस  अकेले  व्रत  से  करोंढ़ों  एकादशी  व्रतों  का   पुण्यफल  प्राप्त  होता  है।इस  दिन  श्रीमद् भागवत  महापुराण  के  दशम स्कंध  में  वर्णित  भगवान  श्रीकृष्ण  की  बाल-लीलाओं  के  श्रवन-मनन  का  विशेष  माहात्म्य  है।


आप  सभी    को    जन्माष्टमी   शुभ   हो।प्रत्येक   परिवार   प्रसन्नता   से   भरपूर  रहे।

 



Thursday, August 21, 2014

प्रिय माँ ,

प्रिय माँ ,
मुझे बताते हुए बड़ा संकोच हो रहा हैं की मैंने घर छोड़ दिया हैं और मैं अपने प्रेमी के साथ रहने चली गयी हूँ मुझे उसके साथ बड़ा अच्छा लगता हैं. उसके वो स्टाइलिश टैटू ,कलरफुल हेयर स्टाइल … मोटरसाइकिल की रफ़्तार, वे हैरतअंगेज करतब. वाह ! उस पर कुर्बान जाऊ. मेरे लिए ख़ुशी की एक और बात हैं. माँ , तुम नानी बनने वाली हो. मैं उसके घर चली गयी, वह एक झुग्गी बस्ती में रहता हैं. माँ उसके ढेर सारे दोस्त हैं. रोज शाम को वो सब इकठ्ठा होते हैं और फिर खूब मौज मस्ती होती हैं. माँ एक और अच्छी बात हैं अब मैं प्रार्थना भी करने लगी हूँ. मैं रोज प्रार्थना करती हूँ की AIDS का इलाज जल्दी से जल्दी हो सके ताकि मेरा प्रेमी लम्बी उम्र पाएं. माँ मेरी चिंता मत करना. अब मैं 16 साल की हो गयी हूँ और अपना ध्यान खुद रख सकती हूँ. माँ तुम अपने नाती -नातिन से मिलने आया करोगी ना ?
 -तुम्हारी बेटी

फिर कुछ नीचे लिखा था...

नोट : माँ ,परेशान होने की जरूरत नहीं हैं. यह सब झूठ हैं . मैं तो पडोसी के यहाँ बैठी हूँ. मैं सिर्फ यही दर्शाना चाहती थी की मेज़ की दराज में पड़ी मेरी मार्कशीट  ही सबसे बुरी नहीं हैं, इस दुनिया में और भी बुरी बातें हो सकती है।

बच्चों से उम्मीद तो रखे पर दबाव ना डालें.कही ऐसा ना हो की दबाव और डांट डपट के चलते वे कोई गलत कदम उठा ले और आपको भारी खामियाजा भुगतना पड़े .

Friday, July 25, 2014

किसे याद हैं बाबा अलाउद्दीन खां!

 

 
 
अलाउद्दीन खां
अलाउद्दीन खां ने पश्चिमी शास्त्रीय संगीत भी सीखा था
मैहर दो बातों के लिए मशहूर है मां शारदा देवी के मंदिर और पद्म विभूषण उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खां की कर्मभूमि के रूप मे. बाबा अलाउद्दीन खां का जन्म 1862 मे हुआ था पूर्वी बंगाल में जो आज बांग्लादेश है.

माना जाता है कि वो मियाँ तानसेन की शिष्य परंपरा के अंग थे. उनके कई मशहूर शिष्यों में पंडित रविशंकर और अली अक़बर ख़ान जैसे कलाकार शामिल हैं.

बाबा अलाउद्दीन खां की एक बड़ी उपलब्धि थी मैहर वाद्य वृंद का गठन जिसने न सिर्फ़ एक मुश्किल समय में मैहर के समाज को संगीत से रौशन किया बल्कि आज भी बाबा द्वारा निर्मित सैकड़ों राग रचनाओं का एक मात्र आईना है.

मैहर देखने में भारत के किसी भी क़स्बे से अलग नहीं है. लेकिन यहाँ माहौल में उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खां की रूह बसती है. लोग उन्हें बाबा के नाम से ही पुकारते हैं, मानो एक निजी रिश्ता क़ायम करना चाहते हों, बाबा के साथ और मैहर की विरासत के साथ.

सवाल यह नहीं है कि ऐसा क्या था बाबा में, सवाल यह है कि ऐसा क्या नहीं था? बाबा अलाउद्दीन ख़ाँ को भारतीय संगीत का पितामह कहा जाता है.

और यह राह चलता आदमी भी यहाँ बता देता है कि बाबा जिस भी वाद्य को छूते वो उनका ग़ुलाम बन जाता था.

कहते हैं बाबा 200 से ज़्यादा भारतीय और पश्चिमी वाद्य बजाते थे. मगर अधिक जाने जाते थे सरोद, सितार वादन और अपनी ध्रुपद गायकी के लिए.

यादें

मैहर के महाराज बृजनाथ सिंह बीसवीं सदी की शुरुआत में उन्हें मैहर लाए थे. लेकिन बाबा जितना दरबार में बजाते थे उससे कहीं अधिक नियमित रूप से मां शारदा देवी के मंदिर में गाते थे.

बाबा के बेटे अली अकबर ख़ान मशहूर सरोद वादक हैं

बाबा की यादें या कहें तो मैहर का संगीत इतिहास आज किस्सों में ज़िंदा है. डॉक्टर कैलाश जैन का परिवार बाबा के क़रीब था.

वे कहते हैं जब उनकी सगाई हो रही थी तो बाबा को नहीं बुलाया गया था. लेकिन जब रात को सगाई में भैरवी गायी जा रही थी जो बाबा को सुनाई दी क्यों कि उनका घर नज़दीक ही था.

बाबा समारोह में पहुंचे और कहा यह इस समय का राग नहीं है. इस समय का राग मैं गा कर सुनाता हूं. और फिर उन्होंने दो घंटे गाया.

आज मैहर में बाबा अलाउद्दीन खां का घर उनकी सादा जीवन शैली और सर्वधर्म सरोकार का परिचय देता है. घर के दो नाम हैं-मदीना भवन और शांति कुटीर.

बाबा के कमरे में उनके वाद्यों के साथ दीवारों पर मढ़ी हैं उनके प्रसिद्ध शिष्यों की तस्वीरें. उनके बेटे और प्रख्यात सरोद वादक अली अकबर ख़ान और पंडित रविशंकर.

बाबा के शिष्यों की सूची तो यहाँ बस शुरु होती है, इसमें जुडते जाते हैं नाम, बांसुरी वादक पन्नालाल घोष, उनकी बेटी अन्नपूर्णा देवी जिन्होंने पंडित रविशंकर से शादी ही नहीं की बल्कि उन्हें सिखाया भी और पंडित हरि प्रसाद चौरसिया.

बाबा अलाउद्दीन खां ने केवल इन महान संगीतकारों को ही नहीं संवारा बल्कि मैहर को संगीत की ऐसी परंपरा दी जो आज भी क़ायम है.

वाद्य वृंद

मैहर वाद्य वृंद अपनी तरह का अनूठा ऑर्केस्ट्रा है. इसकी स्थापना का भी क़िस्सा है. डॉक्टर कैलाश जैन बताते हैं कि 1918-19 में मैहर में प्लेग की महामारी फैलने से कई लोग मारे गए और कई बच्चे अनाथ हो गये.

बाबा ने इन बच्चों को अपने घर में इकट्ठा किया और उनके गुणों के अनुसार उन्हें किसी ना किसी वाद्य को बजाने की शिक्षा दी और इसी तरह अस्तित्व में आया मैहर वाद्य वृंद.

बाबा अलाउद्दीन खां ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ पश्चिमी शास्त्रीय संगीत भी सीखा था और क्लेरनेट, वायलिन और चेलो जैसे पश्चिमी वाद्यों को अपने वाद्यवृंद में शामिल भी किया.

उन्होंने बंदूकों की नाल से एक अनूठे वाद्य नलतरंग का आविष्कार किया. हमने मैहर वाद्द वृंद के एक सदस्य जीपी पांडे से भी मुलाक़ात की और जानना चाहा क्या ख़ूबी है इस ऑर्केस्ट्रा की.

जीपी पांडे कहते हैं कि यह ऑर्केस्ट्रा आज भी बाबा की सैंकड़ों रचनाओं को ऐसे ही बजाता है जैसे बाबा के समय में बजाया जाता था.

यानी हर वाद्य से एक साथ एक ही सुर निकलता है और शायद यह एक मात्र ऐसा ऑर्केस्ट्रा है जिसमें वादक बिना नोटेशन या स्वरलिपि के बजाते हैं.

Friday, July 18, 2014

सफ़र लगती है

जल गया अपना नशेमन तो कोई बात नहीं
देखना ये है कि अब आग किधर लगती है
लम्हे-लम्हे में बसी है तिरी यादों की महक
आज की रात तो खुशबू का सफ़र लगती है


क़ोशिशें मुझको मिटाने की मुबारक़ हों मगर

मिटते-मिटते भी मैं मिटने का मज़ा ले जाऊंगा

शोहरतें जिनकी वजह से दोस्त-दुश्मन हो गए


सब यहीं रह जाएंगी मैं साथ क्या ले जाऊंगा

Kumar Vishwas 

Thursday, May 1, 2014

हार्दिक शुभकामनाएं।

दीपावली के शुभ अवसर पर आपको और आपके परिवार को मेरी  तरफ़ से हार्दिक शुभकामनाएं।
लक्ष्मी जी सदा आपके घर पर निवास करें और आप पर सुख समृद्दि की वर्षा हो।

इस दीपावली विशेष ध्यान दें:

* पटाखों का कम से कम प्रयोग करके, पर्यावरण को वायु प्रदुषण से बचाएं।
* बच्चों को अपनी उपस्थिति मे ही आतिशबाजी जलाने दें।
* आतिशबाजी जलाते समय पानी की बाल्टी पास मे रखें।
* आतिशबाजी जलाते समय सूती कपड़े पहने।
* अपनी जरुरत के मुताबिक ही सामान खरीदें, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के बहकावे मे ना आएं।

सुख औ' समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, आते रहिए, पढते रहिए ......