Sunday, March 10, 2013

चलो हम भी गंगा नहा आयें

चलो हम भी गंगा नहा आयें

व्यंग लेख

कल शाम रेलवे स्टेशन के बाहर महाराज जी मिल गए हमने पूछा महाराज कहाँ ? वो  बड़े  गर्व  से  बोले गंगा स्नान को जा रहे है !हमने अचरज से फिर एक प्रश्न दाग दिया ये क्या है ? जवाब आया बहुत ही काम की चीज है,जीवन धन्य हो जाएगा ! हम भी ठहरे UP के ठेठ ,हमारे मन में भी आतुरता जगी और हमने हाथ जोड़कर कहा .. श्री महाराज जी हमें गंगा स्नान के बारे में विस्तार से बताये ये कब किया जाता है? और इसके करने से क्या लाभ प्राप्त होता है? क्या इस स्नान की कोई विशेष पूजन विधि भी है? इस स्नान को करने कौन-कौन जाता है इस तरह के नम्र निवेदन के बाद महाराज जी बोले अरे आपको इतना नहीं मालूम हिंदू मान्यताओं के मुताबिक कुंभ के पवित्र स्नान से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं। यह भी कहते हैं कि कुंभ में नहाने से सौ गंगा स्नान का पुण्य मिलता है। फिर कुंभ अगर 144 साल बाद वाला खास हो तो उसके तो कहने ही क्या। निश्चित रूप से उसमें तो हर किस्म के पाप धुल ही जाते होंगे।तीर्थराज प्रयाग में स्नान, दान और यज्ञ का बड़ा महत्व है। पुराणों में कहा गया है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर किया गया दान परलोक में या जन्म-जन्मांतर तक कई गुना होकर दानकर्ता को प्राप्त होता है। रही बात आने जाने की तो,हमारे नेता और अभिनेता, सारे के सारे अचानक जाग गए हैं। कुंभ जा रहे हैं। गंगा में नहा रहे हैं और पाप बहा रहे हैं। सास जैसे पवित्र रिश्ते को खलनायिका के अवतार में परोसनेवाली फिल्म निर्माता एकता कपूर कुंभ नहा आई। लगातार सत्ताइस किस करने के बावजूद एक सांस तक न लेनेवाले अभिनेता भी नहा आये  । इसको करने की कोई पूजन विधि तो नहीं है, आप भी लाभ उठाइए इस बार इलाहाबाद  में गंगा किनारे  महाकुंभ  मेला लगा हुआ है ,देश विदेश से लाखो करोडो लोग पहुच रहे है,सरकार ने भी काफी व्यवस्था की है, इतना कहते ही वहा पर कई लोकल भक्त जमा हो गए और गंगा स्नान का विवरण सुनने लगे.... और फिर हमने एक प्रश्न पूछा की महाराज किस तरह के पाप धुलते है इसको करने से....फिर वो थोडा दिमाक में जोर डालते हुए बोले मान्यवर..आप सुबह से शाम तक जो भी कृत्य करते है वो सभी कही न कही इसकी श्रेणी में आते है जैसे जैसे उदाहरण के लिए पराये धन-तन से प्रेम,दूसरो को परेशानी में देख मलाई खाना ,किसी अधिनस्थ के पैसो से मौज किया आदि इस तरह से मनुष्य जाने अनजाने में कई गलतियाँ और पाप करता है, जो की गंगा स्नान करने से प्रभावित नहीं करते |

अचानक एक टपोरी महराज को धक्का देकर आंगे बढ़ गया,उपरांत महाराज ने विस्वामित्री मुद्रा में लोकल और बिहारी भाषा के ह्रदय विदारक शब्दों का प्रयोग किया,और कहा गंगा मैया हमें माफ़ करना..फिर चाय वाले कि आवाज आई महराज पिछला और आज का बिल मिलाकर कुल 25  रुपये हुए.इतना सुनकर महाराज बोल पड़े अरे पिछला कब का हम तो सिर्फ आज का ही देंगे पता नहीं किसका किसका जोड़ लेते हो डरो भगवान से।      

अचानक एक सुकोमल आवाज सुनाई दी 'इटारसी से चलकर इलाहबाद को जाने वाली मेला स्पेसल गाड़ी प्लेटफॉर्म 2 पर आ रही है,तभी महाराज ने हमें अलविदा कहकर आंगे बढ़ गए..उन्हें खाली हाथ देखकर हम उत्सुकतावस बढे और पूछे महराज टिकट न लेंगे ,वो मुस्कान फेरते बोले अरे आप भी न !  अब इतने पाप धोने जा ही रहे है तो ये भी सही| हमारा दिमाक भी घूमा,गंगा स्नान का जितना जोरदार प्रचार करके उसका राजनीतिक और व्यापारिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है, उससे साफ लगता है कि मंशा उनकी पुण्य कमाने की तो कतई नहीं है। महाराज जी के बारे में अपन कतई नहीं जानते कि उन्होंने क्या पाप किए, सो कुंभ नहाने जाये। पाप अपने से भी हुए होंगे, पर कुंभ नहाने आज तक कभी नहीं गए। जाने में भी डर है कि नेताओ और चुम्बन गुरु के नहाए पानी में नहाने से कहीं उनके पाप अपने पर न चढ़ जाएं,लेकिन जब पूरा देश ही एक ओर कु-व्यवस्था में भेड़ चाल चल रहा है,मजे ले रहा है,तो फिर गंगा स्नान तो पुन्य का काम है क्यों  न करे ? चलो हम भी गंगा नहा आयें।  

www.kirtiprabha.com

 

विवेक अंजन श्रीवास्तव 

सरलानगर, मैहर 

 

Monday, February 4, 2013

ये दिल घबराता है...!!


जिंदगी में ऐसा मोड़ क्यों आता है...
की आगे बढ़ने से भी ये दिल घबराता है...!!

रोता रहता है कोई किसी को याद करके...
और कोई सब कुछ भूल कर नयी दुनिया बसाता है...!!

कोई कुछ नहीं कह पाता उम्र भर..
और कोई सब कुछ पल में कह जाता है...!!

बड़ी अजीब है ये सफ़र ये कहानी..
कुछ सोचते है और हो कुछ और जाता है....!!

कितना भी कह ले की भरोसा नही किसी पे...
पर सच है के बिन विश्वास कोई एक कदम ना उठाता है....!!

Monday, January 14, 2013

की कोई नाज हो जैसे

अब जिंदगी ऐसे ठिठुरने लगी कि पूस की रात हो जैसे
वो याद आया तो आँखे नम सी लगी,कल की बात हो जैसे

मै गुम था ,उसकी यादो की तपन में सारी रात बिताया मैने
ना बताया रिश्ता लिबास सा क्यों उतारा, कोई राज हो जैसे

अक्सर खुला रहता है, सुबह -शाम दरवाजा उस बदनाम का
उसके लिए हिन्दू-मुस्लिम, जात-पात कोई बकवास हो जैसे

इन गरीबो की दीवारों में पलस्तर कब लगाएगी जिंदगी
हर शाम हवाए दीवारों ऐसे घुसती है,की कोई खास हो जैसे

आँखों के फूल खिलकर,खुद-ब-खुद शाख से गिर जाते है
तुमको गए हुए तो दिन हो गए, लगता है की आज हो जैसे

मेरे जाने के बाद भी खुदा हमेशा सलामत रखे तुझे,ए बेवफा
इस बेवफाई में अंजन आज भी जिन्दा है, की कोई नाज हो जैसे

Tuesday, December 18, 2012

जब तक वो सुनाती रही

मैं  हमेशा  ही  तुमसे  रहा  ,रूठता
तुम  खड़ी  पास  मुझको  मनाती  रही .

मैं  सदा  दूर  तुमसे  रहा , घूमता -
तुम  खड़ी पास  मुझको  बुलाती  रही .
मै  तुम्हारा  हू  या  नहीं  मै  कैसे  बताता 
तुम  खड़ी  पास  मेरे  मुझको  बताती  रही 

जो  था  तुम्हारी,'आँखों'  में  नहीं  समझा 
तुम  खड़ी  पास  मेरे  कुछ  दिखाती  रही 

अब  है  दिल  की   इच्छा  तो  क्या  होगा  फायदा 
अंजन ने सुना  नहीं , जब  तक  वो  सुनाती  रही   

                                                -- अंजन ..... कुछ दिल से