Friday, April 20, 2012

हौसला हो बुलंद

Hausla Buland Anthem – 

There is a new anthem for Haywards 5000 "Har Kadam Hausla Buland". Hausla Buland anthem of Haywards promotes Haywards 5000 beer brand.

Lyrics of Haywards 5000 song are penned by Javed Akhtar. It is composed and sung by Kailash Kher. Hausla Buland song is a tribute to the unsung heroes of the country who never give up.

Haywards 5000 salutes the inner strength of the heroes of our country through Har Kadam Hausla Buland anthem who face challenges everyday in their life and never give. It is an inspiring and energetic anthem inspired by some real stories.

जैसे  कंधे  पे  इक  दोस्त  का  हाथ  हो 
जैसे  लफ्जों  पे  दिल  की  हर  एक  बात हो 
जैसे  आँखों  से  चिंता  की  चिलमन  हटे 
जैसे  मिट  जाए  हर  ग़म  कुछ  इतना  घटे 
जैसे  राहों  में  सपनो  की  कालिया खिले 
जैसे  दिल  में  उजालो  के  दरिया  बहे 
जैसे  तन्न -मन   कोई  गीत  गाने  लगे 
जैसे  सोई  हुई  हिम्मत  अंगडाई  ले 
जैसे  जीना  ख़ुशी  की  कहानी  लगे 
जैसे  खुल  जाए  रस्ते  अब  तक  थे  बंद 

हौसला  हो  बुलंद 

हौसला  हो  बुलंद 

हौसला  हो  बुलंद 
हौसला  जैसे  आस्मां  से  हो  बुलंद 
हौसला  हो  बुलंद 

हौसला  हो  बुलंद 

हौसला  हो  बुलंद 
हौसला  जैसे  आस्मां  से  हो  बुलंद 

हौसला  हो  बुलंद  

हौसला  हो  बुलंद

हौसला  हो  बुलंद

Vivek Anjan Shrivastava

www.vivekanjan.com

Friday, April 6, 2012

कोशिश भी करते है

लीक से हटकर चलने की कोशिश भी करते है

थोडा बहुत भीड़ में पहचान हम भी रखते है

ज़माने से कह दो संभलकर उगलियाँ उठाये

अपनी जुबान में तलवार हम भी रखते है

सोचते है जाने से पहले लोगो की सोच बदल जाये

जिंदगी के किस्तों का हिसाब हम भी रखते  है

हम वो नही जो वक्त के साथ,अपने  रिश्ते,बदल जाये 

दिल से रिश्तो को निभाने का रिवाज हम भी रखते है

 

जो बेवफा है हो सकता है वो किसी और के हो जाये

अंजन हैआँखों में बसने का ख्याल हम भी रखते है

 

अंजन ..... कुछ दिल से 

 

Login :         http://tiny.cc/0hrgbw

 

सतना जिला प्रशाशन का सराहनीय प्रयास



एक समय था जब सतना सिटी कोतवाली-प्रेमनगर रेलवे क्रोसिंग पार आये दिन दुर्घटनाये होती थी और जाम लगा रहता था ,फिर अंडर-ब्रिज का निर्माण होने से ये आलम अब नही देखने को मिलता है! 
वही अब शहर के मुख्य मार्ग से भारी वाहनों के आवागमन की वजह से मार्ग दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। इन वाहनों की चपेट में आकर अब तक कई घरों के चिराग भी बुझ चुके हैं और कई लोग गंभीर रूप से चोटिल भी हो चुके हैं।सडक दुर्घटना की घटना तो आम बात है लेकिन सतना में इस तरह की दुर्घटनाएं रोज़ हो रही है ,निजी वाहनों की मनमानी,ट्रेक्टर ट्रोलियों की सडकों पर तेज़ रफ्तार , ओवर लोड वाहन गाली गुप्तार कर रहे हें ,बड़े राईस-जादे कारों में शराब की बोतलें टकरा कर बिना सीट बेल्ट के ह्गामे कर रहे हें तेज़ वाहनों की रफ्तार ,चक्के जाम जनता को दुखी कर रहे हें
 कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के.के.खरे ने बाईपास निर्माण होने तक सतना नगर के भारी वाहनो की ट्रैफिक ब्यवस्था के संबंध मे अस्थाई तत्कालिक ब्यवस्था करने के दृष्टि से प्रस्तावित संभावित रूटो के लिये आवश्यक आदेश जारी किये है,जो की एक सराहनीय प्रयास है कई वर्षो से चल रहे इस काम को अब प्रशाशन  ने मुस्तैदी से पूरा करने की ठानी है जो की काबिले तारीफ है |
शहर का मुख्य मार्ग ही नही ,शहर के अन्दर भी दुर्घटनाये होती रहती हैसतना एक औद्योगिक नगरी हैइस वजह से यहां लगातार यातायात का दबाव बढ़ता है। शहर की ट्रेफिक व्यवस्था बिगाड़ने में अतिक्रमकारियों का मुख्य हाथ है। इन्हें हटाने प्रशासन द्वारा इन्हें चिंहाकित किया जा रहा है।जैसे सिटी कोतवाली से धवारी चौराहे तक अस्थाई  दुकाने चकाजाम का कारण बनती है ,  शहर में कई  स्थानों में पार्किंग स्थल में वाहन खड़े नही होते  है , उनके खिलाफ प्रशासन सख्त कार्यवाही करनी चाहिए । शहर में सुव्यवस्थित यातायात  व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस व नजूल की एक टीम गठित कर जल्द ही शहर में भ्रमण कर अवैध अमिक्रमण करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना होगा ,वही प्रेमनगर-सिविललाइन में बने हुए नए मार्ग में कुछ रंगों द्वारा फुटपात और बीच की पट्टी चिन्हित करना चाहिए जो की रात में नजर नहीं आते है!     
जहा एक ओर जिला प्रशाशन इसके लिए प्रयासरत है वही इस कार्य में आम जनता को सहयोग करना चाहिए। 
विवेक अंजन श्रीवास्तव 
सरलानगर , मैहर 

Friday, March 16, 2012

‘अंजन' कुछ दिल से….मेरा पहला काव्य संग्रह



अंजन काजल का समानार्थी शब्द है !  काजल एक श्याम पदार्थ है जो धुंए की कालिख और तेल तथा कुछ अन्य द्रव्य को मिलाकर बनाया जाता है ।इसका उपयोग पारम्परिक हिन्दू श्रृंगार मेंआँखों में ,व्यापक रूप से होता रहा है | काजल और अंजन के द्वारा नेत्रों   में श्यामता ,विशालता एवं प्रभावपूर्ण कटाक्ष उत्पन्न किया जाता है
इसी शब्द पर आधारित है यह मेरा पहला  काव्य संग्रह  
 'अंजन' कुछ दिल से…. 

कहने को तो अंजन  एक श्याम पदार्थ है जो धुंए की कालिख से बनता है और देखने में भी अच्छा नहीं है ,लेकिन अगर अंजन को सही जगह ( आँखों ) पर सही तरीके से लगाया जाये तो सुन्दर बनाने में कोई कमी नहीं रखता है | 

ऐसे  ही यह समाज अंजन की तरह  बुरी चीजो से मिलकर बना है,इस समाज में अवसाद,निराशा,विस्वासघात ,धोखेबाजी,दुश्मनी आदि चीजे है |इसके विपरीत अगर इनको हम अंजन की तरह ले और आत्मविश्वास,प्यार,दोस्ती को अपनाये तो हमारा मन भी  निरंजन हो जाएगा बेवफाई,गिले शिकवे भूलकर अगर हम मन शांत करे तो परम आनंद प्राप्त होगा | 

इसलिए इन्ही बिन्दुओ जीवन,आत्म-विस्वास ,जिंदगी ,प्यार ,बेवफा,दोस्त,गाव,यादें,धोखा और आस पर यह काव्य संग्रह आधारित है | मेरी अधिकाँश रचनाये बाकी रचनाकारों की तरह इश्क परस्त हैं इसलिए उनमें आपको यादेंरातेंनींदख्वाबतनहाईअँधेराउदासी तो मिलेंगी ही साथ ही ज़माने के बारे में भी विचार देखने को मिलेंगे
सोचते है जाने से पहले लोगो की सोच बदल जाये,
जिंदगी के किस्तों का हिसाब हम भी रखते  है |
हम वो नही जो वक्त के साथ, अपने  रिश्ते बदल जाये ,
दिल से रिश्तो को निभाने का रिवाज हम भी रखते है ||

मूल्यों का बिखराव मुझे गहरे तक आहत करता है | मेरी व्यथा और तल्खियाँ इस संग्रह की रचनाओ से झांकती है;परन्तु इन तल्खियो में न तो हताशा है और न  परिस्थितियों के सामने समर्पण का पराजय बोध |
तस्वीर के तमाम उदास और धुंधले रंगों का बयान तो बड़े ईमानदारी के साथ करने की कोशिश की है  ,पर साथ ही इस तस्वीर को बदलना भी चाहता हूं   

सोलह रुपये में फुटपातो की पहचान कैसे हो  जाये
अंजन' कुछ करें गरीबी की लक्ष्मण रेखा पार हो जाये

मन में  आत्मविश्वास और आशा हमेशा ही रही जो कि शब्दों से बयान की है 

पंखो के परवाजो को अब जल्द शिखर मिल जाएगा
चाहे लाख तूफा आये दिया और प्रखर जल जाएगा


प्यार का स्वरुप बखान करने की जरूरत नहीं होती वह तो खुद खुशबू की तरह फ़ैल जाता है 


गाव- गाव,गली-मोहल्ले,अब तेरे मेरे कहानी-किस्से है
सारा जग तो एक अंजन है ,पर अंजन  तेरा दीवाना है

प्यार को नाम भी दिया ,

दिल की कलम प्यार की स्याही रख्खा था
मैंने अपने सनम का नाम माही रख्खा था

बेवफाई और गम हर इन्सान का अभिन्न अंग रहा है जाहिर है मेरा भी है

सब कुछ था लाश में बिना दिल के
शायद जीवन भी प्यार में कम गया
बिछड़ने का आँखों में अहसास था
अंजन वो जब दूर गया नम गया

जिंदगी में कसमकस हमेशा बनी रही ,या तो बहुत कुछ मिल गया या फिर छूट गया है | कुछ सपने पूरे हो गए या कई मुकाम अभी बाकी है

हमेशा  नए लोग मिलते रहे ,घर बनाना ,बच्चो को पठाना ,काम में वफ़ादारी,छोटे छोटे सपने और जिंदगी से झूझते लोग | इन्ही सब लोगो से मुझे रचना की प्रेरणा मिलती रही|

मुझे मिले ना मिले पर हसी उनके साथ रहे जो मेरे साथ हैं 
मै वो ना हो सका ,जो वो हो गए
इन्सान से वो खुदा हो गए
सलाम ऐसे  लोगो को ,जो,
कुछ अलग कर सबसे जुदा हो गए

इस संग्रह कि रचनाओ को संभवतः परंपरागत काव्य के तर्कों में शायद न ढाला जा सके,इसलिए कुछ लोग इसमे शिल्पगत परिवर्तन सुझा सकते है | मुझे शब्द शिल्पी तथा साहित्य का निष्णात ज्ञाता होने का भ्रम नहीं है मैंने अपने अनुभवों को,अपमी संवेदनाओ को  और अपने मन की कसक को बड़ी सहजता के साथ व्यक्त करने की कोशिश की है

हम पर तिरछी नजर रहती है सबकी
क्यों डरे, हम थोड़े किसी की जागीर हैं
थोडा ही लिख पाते है और क्या करें
हम अंजन हैं ,थोड़े ना कोई मीर  हैं

क्रमश:……

                                                                   Anjan...

14 -फरवरी -2012, सतना                  विवेक अंजन श्रीवास्तव


link: http://tiny.cc/0hrgbw