न अधिक ऊँचाईयो में उड़ सकेगा,
न धरा के बन्धनों में बंध सकेगा ,
मिले कोई भी दिशा,वह बढ़ चलेगा,
संग मेरे क्षितिज तक,मेरा परिश्रम !
अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता और जीवन-कर्म के बीच की दूरी को निरंतर कम करने की कोशिश का संघर्ष....
अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता और जीवन-कर्म के बीच की दूरी को निरंतर कम करने की कोशिश का संघर्ष....